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अपवित्र दृष्टि, वृत्ति, बदले का भाव आदि व्यक्ति को जेल में डाल देते हैं जहाँ सिवाय पश्चात्ताप की अग्नि के और कोई साथी नहीं रहता। काम से पीड़ित व्यक्ति पढ़ाई, कारोबार में कभी भी एकाग्र नहीं हो पाता इसलिए सफलता हमेशा दूर ही रहती है। ऐसी अशुध्द भावनाओं के साथ, ईश्वर से जुड़ना भी मुश्किल हो जाता है।

 

आध्यात्मिक ज्ञान हमें सही अर्थ में प्रेम, सुख, आनंद की परिभाषा बताता है, स्वयं की व ईश्वर की सत्य पहचान देता है। ईश्वर से जुड़ने से हम प्रेम से भरपूर होने लगते हैं इसलिए हमें किसी से प्रेम मांगने की जरूरत नहीं रहती, हम सिर्फ सबको देते जाते हैं।

 

हमें कुछ वक्त निकाल कर, ईश्वर के ध्यान से, स्वयं को सर्वगुण, सर्व शक्तियों से भरकर खुशी से जीना है और दूसरों को इस प्रकार जीने में सहायक बनना है। परिवार में रहते, कारोबार करते, ईश्वर से जुड़ना सबसे सहज मार्ग है।

Write:BK Dr. Shubhangi Shinde

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